उत्तराखंड : कोरोना संक्रमण के चलते इस साल वाहन उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पिछले साल के मुकाबले इस साल वाहनों की बिक्री में लगभग 50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। मंदी के इस समय से गुजर रहे उद्योग की नजरें अब अक्टूबर से शुरू होने वाले त्यौहार के सीजन पर टिकी हैं। उनको उम्मीद है कि यह सीजन बाजार को पटरी पर लाने में कुछ सहायता करेगा।
राज्य में फिलहाल 29 लाख से ज्यादा वाहन अलग-अलग जिलों में पंजीकृत हैं। हर साल इनके आंकड़ों में 1.75 लाख से लेकर 2 लाख तक की वृद्धि होती है। यानि हर साल लगभग 2 लाख नए वाहन सड़कों पर उतरते हैं। पिछले सात-आठ सालों में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2009 में राज्य में लगभग 10 लाख वाहन पंजीकृत थे। लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर 29 लाख तक पहुंच चुका है। इसी कारण से पिछले कुछ सालों में सभी नामी कंपनियों ने हर जिले में अपने शोरूम खोले हैं।
लेकिन तेजी से बढ़ रहे इस कारोबार को कोरोना ने इस साल झटका दे दिया है। परिवहन विभाग में वाहनों के पंजीकरण के आंकड़े इस बात का बयां कर रहे हैं। वर्ष 2019 में अगस्त तक 99378 नए वाहनों का पंजीकरण हुआ था। वर्ष 2020 में यह आंकड़ा 50480 तक ही पहुंच पाया है।
वाहनों के पंजीकरण में सबसे ज्यादा नुकसान ऋषिकेश में हुआ है। यहां पंजीकरण की दर में 67.44 प्रतिशत कमी देखी गई है। इसी तरह रुड़की में 59.23 और काशीपुर में 56.34 प्रतिशत की कमी आई है। इस लिहाज से पौड़ी की स्थति काफी अच्छी है। यहां वाहनों के पंजीकरण में मात्र 3.36 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं, पिथौरागढ़ में 21.35 और बागेश्वर में 23.57 प्रतिशत कमी दर्ज की गई है। इससे परिवहन विभाग के राजस्व में भी खासा नुकसान हुआ है।
उप परिवहन आयुक्त एसके सिंह का कहना है कि कोरोना की वजह से पहले बाजार बंद रहने और अभी बाजार में मंदी के कारण यह गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले त्यौहारी सीजन को देखते हुए बाजार में वाहनों की बिक्री में तेजी आ सकती है।

