देहरादून : कोरोना संकट के बीच बुधवार को आयोजित हुए मानसून सत्र में विपक्ष से लेकर सत्तापक्ष के विधायकों के सवाल भी केवल लिखित रूप में लिए गए। साथ ही उन्हें इन सवालों के जवाब भी लिखित रूप में ही प्राप्त हुए। प्रश्नकाल नहीं हुआ। विपक्ष ने हंगामा तो किया ही, किन्तु पहली बार ऐसा हुआ कि सदन के अंदर न मंत्रियों पर सवालों की बौछार हुई और न ही जवाबों को लेकर विपक्ष दल के बीच नोकझोंक।
कोरोना महामारी के कारण इस बार विधानसभा मानसून सत्र एक दिवसीय रहा। इस दौरान सरकार सभी 19 विधेयक पारित करने में कामयाब रही। सदन की कार्यवाही को तीन घंटे छह मिनट बाद ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
कोरोना संक्रमण के कारण सत्र में तमाम कार्यवाही को सीमित तरीके से पूरा किया गया। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले सुबह 11 बजे सबसे पहले दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ प्रणब मुखर्जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद दिवंगत पूर्व विधायकों बृजमोहन कोटवाल व नारायण सिंह भैंसोड़ा को भी सदन ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने सदन के पटल पर महालेखाकार लेखा परीक्षा उत्तराखंड की पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों पर वार्षिक तकनीकी निरीक्षण रिपोर्ट रखी। साथ ही भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की 2018-19 के वित्त लेखे व विनियोग लेखे और 31 मार्च, 2019 के लिए राज्य के वित्त पर ऑडिट रिपोर्ट पेश की गई।
दिन में 1 बजे के बाद सत्र की कार्यवाही को दोबारा शुरू किया गया। इस दौरान संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने 19 विधेयक सदन के पटल पर रखे। श्रम विधेयकों पर चर्चा के समय सत्तापक्ष के विधायकों मुन्ना सिंह चौहान, सुरेंद्र सिंह जीना ने कारखानों के साथ श्रमिकों के हितों को भी सुरक्षित रखने की पैरोकारी की। दोपहर में भोजन अवकाश के बाद सभी विधेयकों पर सदन द्वारा मुहर लग गई। इसके बाद शाम 4 बजे सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
सत्र के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, चार कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, मदन कौशिक, अरविंद पांडेय व सुबोध उनियाल, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रेखा आर्य समेत सत्तापक्ष और विपक्ष के 42 विधायक मौजूद रहे। शारीरिक दूरी का ध्यान रखा गया जिसके लिए विधानसभा के मौजूदा मंडप का विस्तार किया गया था।

