कोरोना के चलते चार लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने की चारधाम यात्रा.

उत्तराखंड : इस बार कोरोना महामारी के संकट के बावजूद चार लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने चारों धामों के दर्शन किए। कोरोना संक्रमण के चलते इस बार यात्रा देर से शुरू हुई, लेकिन बरसात के बाद उसने काफी गति पकड़ ली। इस बार पहले ही दिन से चारधाम यात्रा के आयोजन को लेकर संशय से लेकर संकट की स्थिति रही।
पहले बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के रावल के समय पर पहुंचने को लेकर संशय रहा। जब वो पहुंचे, तो उसके बाद भी उनके क्वारंटाइन होने के कारण दिक्कत हुई। हालांकि, बदरीनाथ धाम के अलावा अन्य शेष धाम अपने तय समय पर ही खुले, लेकिन यात्रा शुरू नहीं हो पाई। यात्रा तमाम पाबंदियों, कोरोना प्रोटोकॉल के साथ बाद में शुरू हुई, लेकिन तब तक बरसात शुरू होने के कारण श्रद्धालु सीमित संख्या में ही पहुंचे। 
यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या सितंबर महीने से बढ़नी शुरू हुई, जो अक्टूबर, नवंबर में चरम पर पहुंची। यही वजह रही, जो यात्रा संपन्न होते समय श्रद्धालुओं का आंकड़ा चार लाख से ज्यादा पहुंच सका। सबसे अधिक 3.10 लाख श्रद्धालु बदरीनाथ धाम पहुंचे, केदारनाथ धाम में 1.34 लाख, गंगोत्री 23837 और यमुनोत्री 7731 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
रविनाथ रमन (सीईओ उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड) ने बताया कि कोरोना महामारी के मुश्किल दौर के बावजूद इस बार चारधाम यात्रा का सफल संचालन किया गया। सितंबर, अक्तूबर, नवंबर महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इस बार की स्थितियों को भांपते हुए 2021 की चार धाम यात्रा की तैयारियों को और भी बेहतर तरीके से संपन्न किया जाएगा।

2014 में थे सबसे कम श्रद्धालु
चारधाम में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 2013 की आपदा के बाद घट कर न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई थी। 2014 में 2.13 लाख श्रद्धालुओं ने ही दर्शन किए थे। केदारनाथ धाम में तो उस वक्त सिर्फ 26614 श्रद्धालु ही पहुंचे थे। 16 जून 2013 को आई आपदा में केदारनाथ धाम में आई प्रलय से सब तहस नहस हो गया था। इसके बाद ये पहला मौका है, जब चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या पांच लाख से नीचे रही।

परेशानियों से मिला सबक
उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम एवं प्रबंधन बोर्ड इस कोरोना को एक सबक के रूप में लेकर चल रहा है। पिछली बार कोरोना के कारण यात्रा तैयारियों पर बुरा असर पड़ा। यहां तक की रावल भी तय समय पर नहीं पहुंच पाए। इसके कारण बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख तक बदलनी पड़ी। ये सब परेशानियां बोर्ड के लिए सबक के रूप में साबित हुई हैं। 

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