कैम्पा के तहत निधि खर्चने के लिए वनाधिकारियों के बढ़ेंगे वित्तीय अधिकार.

देहरादून : राज्य में प्रतिकरात्मक वनरोपण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (कैंपा) के द्वारा होने वाले क्षतिपूरक वनीकरण समेत अन्य कार्यों की धीमी प्रगति ने सरकार को परेशानी में डाल दिया है। पिछले चार सालों में अब तक किसी भी साल कैंपा की सालाना कार्ययोजना में शत-प्रतिशत प्रगति हासिल नहीं हो पाई।
इसको देखते हुए अब कैंपा निधि खर्च को ध्यान में रखते हुए वनाधिकारियों के वित्तीय अधिकार बढ़ाने की तैयारी है। इसके साथ ही फील्ड में फ्रंटलाइन स्टाफ की तैनाती भी की जाएगी।
कैंपा निधि से होने वाले कार्यों की धीमी प्रगति पहले से ही लगातार सुर्ख़ियों में बनी रही है। अभी हाल ही में राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई कैंपा की समीक्षा बैठक में भी यह मुद्दा उठा था। यह बात सामने आई कि साल 2017-18 में कैंपा की स्वीकृत वार्षिक कार्ययोजना के सापेक्ष प्रगति महज 29 प्रतिशत रही। इसी तरह वर्ष 2018-19 में 37 प्रतिशत, वर्ष 2019-20 में 58 प्रतिशत और वर्ष 2020-21 (अब तक) में 13 प्रतिशत ही प्रगति रही। इससे साफ पता चलता है कि कैंपा निधि से पर्याप्त धनराशि मिलने के बावजूद यह खर्च नहीं हो पा रही।
मुख्यमंत्री ने भी कैंपा निधि के कम व्यय पर चिंता जताई थी। समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि कैंपा निधि खर्च करने के लिए प्रभागीय वनाधिकारी, वन संरक्षक व मुख्य वन संरक्षक स्तर पर दिए गए वित्तीय अधिकार कम हैं। इसलिए इन्हें बढ़ाने की जरुरत है। इसके अलावा कम खर्च के पीछे एक बड़ी वजह फील्ड में फ्रंटलाइन स्टाफ की कमी होना भी बताया गया।
इन सब बातों को देखते हुए अब इन दोनों मामलों में कवायद शुरू कर दी गई है। साथ ही प्रभागों में उपलब्ध मानव संसाधन का बेहतर उपयोग करने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, कैंपा निधि मामले में वनाधिकारियों के वित्तीय अधिकारों के संबंध में पत्रावली पूर्व में शासन को प्रेषित की गई थी। यह वित्त विभाग में विचाराधीन है।
अब इसके बावजूद, पूरे मामले को लेकर फिर से मसौदा तैयार कर शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश वन विभाग को दिए गए हैं। प्रमुख सचिव वन आनंद बद्र्धन ने बताया कि वन विभाग से प्रस्ताव मिलने के बाद इस संबंध में आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

Trending Now